विराम चिह्न क्या हैं? हिंदी में विराम चिह्न के सभी प्रकार, उनके नाम, चिन्ह, नियम और उदाहरण आसान भाषा में जानिए।
विराम का अर्थ है—रुकना। किसी भी वाक्य को बोलते व लिखते समय विराम चिह्न ही हमें संकेत देते हैं कि कब थोड़े समय के लिए रुकना है अथवा कब पूर्ण रूप से रुकना है यानी विराम लेना है;
लिखने में रुकावट या विराम के स्थानों को जिन चिह्नों द्वारा प्रकट किया जाता है, उन्हें विराम चिह्न कहते हैं। इनके प्रयोग से वक्ता के अभिप्राय में अधिक स्पष्टता का बोध होता है। इनके अनुचित प्रयोग से अर्थ का अनर्थ भी हो जाता है; जैसे—
वाह! क्या दृश्य है। पढ़ो, मत खेलो।
ऊपर दिए गए वाक्यों में प्रयुक्त (!), (।) तथा (,) आदि विराम चिह्न हैं जो इन वाक्यों के भाव और अर्थ को पूरी तरह स्पष्ट करने के लिए आवश्यक हैं।
“कल रात एक नवयुवक मेरे पास पैरों में मोजे और जूते, सिर पर टोपी, हाथ में छड़ी, मुँह में सिगार और कुत्ता पीछे-पीछे लिए आया।”
“कल रात एक नवयुवक मेरे पास, पैरों में मोजे और जूते, सिर पर टोपी, हाथ में छड़ी, मुँह में सिगार और कुत्ता पीछे-पीछे लिए, आया।”
विराम चिह्नों के बदलने से वाक्य का अर्थ भी बदल जाता है; जैसे—
उसे रोको मत, जाने दो।
उसे रोको, मत जाने दो।
उन्नीसवीं शताब्दी के पहले तक हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं में विराम-चिह्नों के रूप में मुख्य रूप से एक पाई (।) और दो पाई (॥) का प्रयोग किया जाता था। बाद में कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना हुई और अंग्रेजों के संपर्क के कारण हिन्दी में अंग्रेजी के कई विराम-चिह्नों का प्रयोग शुरू हो गया। उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक ये विराम-चिह्न हिन्दी में काफी प्रचलित हो गए थे। बीसवीं शताब्दी की शुरुआत से हिन्दी में विराम-चिह्नों का प्रयोग व्यवस्थित रूप से होने लगा। आज हिन्दी व्याकरण में इन विराम-चिह्नों को पूरी तरह मान्यता प्राप्त है। हिन्दी में कई प्रकार के विराम-चिह्नों का प्रयोग किया जाता है।
| क्र. | नाम | चिह्न |
|---|---|---|
| 1. | पूर्ण विराम (Full stop) | । |
| 2. | अर्द्ध विराम (Semi-colon) | ; |
| 3. | अल्प विराम (Comma) | , |
| 4. | प्रश्नवाचक चिह्न (Sign of interrogation) | ? |
| 5. | विस्मयादिबोधक चिह्न (Sign of exclamation) | ! |
| 6. | उद्धरण चिह्न (Inverted commas) | “ ” |
| 7. | निर्देशक या रेखिका (Dash) | — |
| 8. | विवरण चिह्न (Colon dash) | :- |
| 9. | अपूर्ण विराम (Colon) | : |
| 10. | योजक विराम (Hyphen) | – |
| 11. | कोष्ठक (Brackets) | ( ) { } [ ] |
| 12. | संक्षेप चिह्न (Short dash) | o, . |
| 13. | लोपसूचक चिह्न | + × + × + |
| 14. | प्रतिशत चिह्न | % |
| 15. | समानतासूचक चिह्न | (=) |
1. पूर्ण विराम का प्रयोग (।)
वाक्य पूरा होने पर अंत में पूर्ण विराम लगाया जाता है। पूर्ण विराम का अर्थ है भली-भाँति ठहरना। इसका प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में होता है—
▪ अमित अपने घर गया।
▪ नमिता कल दुबई जाएगी।
(क) प्रश्नवाचक और विस्मयादिबोधक वाक्यों को छोड़कर शेष सभी वाक्यों के अन्त में पूर्ण विराम का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ यह पुस्तक अच्छी है।
▪ गीता खेलती है।
▪ बालक लिखता है।
(ख) किसी व्यक्ति या वस्तु का सजीव वर्णन करते समय वाक्यांशों के अन्त में भी पूर्ण विराम का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ गोरा बदन। स्फूर्तिमय काया। मदमाते नेत्र। भोली चितवन। चपल अल्हड़ गति।
(ग) प्राचीन भाषा के पद्यों में अर्द्धली के पश्चात् पूर्ण विराम का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ परहित सरिस धरम नहि भाई।
परपीड़ा सम नहि अधमाई॥
2. अर्द्ध विराम का प्रयोग (;)
अर्द्ध विराम का अर्थ है आधा विराम। जहाँ पूर्ण विराम की तुलना में कम रुकना होता है, वहाँ अर्ध विराम का चिह्न लगाया जाता है। जब वाक्य का एक भाग तो समाप्त हो जाए लेकिन वाक्य अभी पूरा न हुआ हो तो अर्ध विराम का चिह्न लगाया जाता है।
इसका प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में होता है—
(क) जहाँ संयुक्त वाक्यों के मुख्य उपवाक्यों में परस्पर विशेष सम्बन्ध नहीं होता है, वहाँ अर्द्ध विराम द्वारा उन्हें अलग किया जाता है; जैसे— स्वतंत्रता की घोषणा होते ही ‘वंदे मातरम्’ गूँज उठा; देश के सपूत एक-दूसरे के गले लग गए।
(ख) मिश्र वाक्यों में प्रधान वाक्य के साथ पार्श्व प्रकट करने के लिए अर्द्ध विराम का प्रयोग किया जाता है; जैसे— जब मेरे पास रुपए होंगे; तब मैं आपकी सहायता करूँगा।
(ग) अनेक उपाधियों को एक साथ लिखने में, उनमें पार्श्व प्रकट करने के लिए इसका प्रयोग होता है; जैसे—
डॉ. श्री निवास शर्मा, एम.ए.; पी.एच.डी.; डी.लिट.।
3. अल्प विराम का प्रयोग (,)
अल्प विराम अर्थात् कम समय के लिए रुकना। वाक्य में कम समय के लिए रुकने के लिए अल्प विराम का प्रयोग होता है। इस चिह्न का प्रयोग सर्वाधिक होता है। सामान्यतः अल्प विराम का प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में होता है—
अल्प विराम का प्रयोग अनेक स्थितियों में किया जाता है; जैसे—
(क) वाक्यांशों को जोड़ने के लिए, जैसे—राजू बाजार गया, सब्जी लाया और खाना बनाया।
(ख) वाक्य में आए एक जैसे शब्दों को अलग करने के लिए अथवा जहाँ एक तरह के कई शब्द, वाक्यांश या वाक्य एक साथ आते हैं, तो उनके बीच अल्प विराम का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ राजू, संदीप, महेश और वीरेन्द्र घूमने गए।
(ग) जहाँ भावातिरेक के कारण शब्दों की पुनरावृत्ति होती है, वहाँ अल्प विराम का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ सुनो, सुनो, ध्यान से सुनो, कोई गा रहा है।
(घ) सम्बोधन के समय जिसे सम्बोधित किया जाता है, उसके बाद अल्प विराम का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ हाँ, मैं आ रहा हूँ।
(ङ) जब हाँ अथवा नहीं को शेष वाक्य से पृथक् किया जाता है, तो उसके बाद अल्प विराम का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ हाँ, मैं कविता करूँगा।
(च) पर, परन्तु, इसलिए, अतः, क्योंकि, बल्कि, तथापि, जिससे आदि समुच्चयबोधक से पहले अल्प विराम का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ शकुनि समझदार था, परंतु कपटी था।
(छ) उद्धरण चिह्न से पहले अल्प विराम का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कहा, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।”
(ज) यह, वह, तब, तो और अब आदि के लोप होने पर वाक्य में अल्प विराम का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ जब जाना ही है, जाओ।
(झ) बस, वस्तुतः, अच्छा, वास्तव में आदि से आरम्भ होने वाले वाक्यों में इनके पश्चात् अल्प विराम का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ वास्तव में, मनोबल सफलता की कुंजी है।
4. प्रश्नवाचक चिह्न का प्रयोग (?)
जिस वाक्य में प्रश्न पूछा गया हो, तो उसके लिए प्रश्नसूचक चिह्न का प्रयोग किया जाता है; जैसे—
▪ ये लोग कौन हैं?
▪ आप क्या कर रहे हैं?
टिप्पणी: अप्रत्यक्ष कथन वाले प्रश्नवाचक वाक्यों के अन्त में प्रश्नवाचक चिह्न नहीं लगाया जाता; जैसे—
▪ मैं यह नहीं जानता कि मैं क्या चाहता हूँ।
5. विस्मयादिबोधक चिह्न का प्रयोग (!)
(क) विस्मय, हर्ष, शोक, घृणा, भय, उल्लास, आश्चर्य आदि को प्रकट करने के लिए विस्मयादिबोधक चिह्न का प्रयोग किया जाता है; जैसे—
▪ हाय! अब क्या होगा?
▪ अरे! वह अनुत्तीर्ण हो गया।
▪ वाह! तुम धन्य हो।
(ख) विनय, व्यंग्य, उपहास इत्यादि को व्यक्त करने वाले वाक्यों के अन्त में पूर्ण विराम के स्थान पर इसी चिह्न का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ आप तो हरिश्चन्द्र हैं! (व्यंग्य)
▪ हे भगवान! दया करो! (विनय)
▪ वाह! वाह! फिर साइकिल चलाइए! (उपहास)
6. उद्धरण चिह्न का प्रयोग (‘ ’) (“ ”)
उद्धरण चिह्न दो प्रकार के होते हैं—इकहरे चिह्न (‘….’) और दोहरे चिह्न (“….”)। उद्धरण चिह्नों का प्रयोग निम्नलिखित दशाओं में होता है—
(क) किसी लेख, पुस्तक, समाचार-पत्र, कहानी, कविता और पुस्तक इत्यादि का शीर्षक लिखने में इकहरे उद्धरण चिह्न का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ क्या तुमने आज का ‘नवयुग’ पढ़ा है?
▪ ‘रामायण’ एक धार्मिक पुस्तक है।
▪ मैंने तुलसीदास जी का ‘रामचरितमानस’ पढ़ा है।
(ख) जब किसी शब्द की विशिष्टता अथवा विलगता सूचित करनी होती है तो इकहरे उद्धरण चिह्न का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ खाना का अर्थ ‘घर’ होता है।
(ग) उद्धरण के अन्तर्गत कोई दूसरा उद्धरण होने पर इकहरे उद्धरण चिह्न का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ डॉ. वर्मा ने कहा है, “निराला जी की कविता ‘वह तोड़ती पत्थर’ बड़ी मार्मिक है।”
(घ) किसी के कथन को ज्यों का त्यों देने के लिए दोहरे उद्धरण चिह्न का प्रयोग होता है; जैसे—
(i) माँ ने कहा है, “मैं किसी की बात नहीं सुनूँगी।”
(ii) नेहरू जी ने कहा, “आराम हराम है।”
सरदार पूर्णसिंह का कथन है—
▪ “हल चलाने वाले और भेड़ चराने वाले स्वभाव से ही साधु होते हैं।”
7. निर्देशक या रेखिका का प्रयोग (—)
निर्देशक या रेखिका (—) का प्रयोग वाक्य में किसी कथन, विवरण, उदाहरण या अतिरिक्त जानकारी को स्पष्ट रूप से अलग दिखाने के लिए किया जाता है। इसके प्रमुख प्रयोग इस प्रकार हैं—
(क) किसी व्यक्ति के कथन को ज्यों का त्यों लिखने से पहले रेखिका का प्रयोग किया जाता है; जैसे—
▪ तुलसी ने कहा है—“परहित सरिस धरम नहि भाई।”
(ख) किसी विषय या बात का विवरण प्रस्तुत करने से पहले रेखिका का प्रयोग किया जाता है; जैसे—
रचना के आधार पर शब्द तीन प्रकार के होते हैं—रूढ़, यौगिक और योगरूढ़।
(ग) ‘जैसे’, ‘यथा’ और ‘उदाहरण’ आदि शब्दों के बाद उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए रेखिका का प्रयोग किया जाता है; जैसे—
संस्कृति की ‘स’ ध्वनि फ़ारसी में ‘ह’ हो जाती है; जैसे—असुर > अहुर।
(घ) वाक्य में किसी अधूरे या बीच में रुके हुए विचार को आगे की बात से जोड़ने के लिए रेखिका का प्रयोग किया जाता है; जैसे—
आज ऐसा लग रहा है—मैं घर पहुँच गया हूँ।
(ङ) किसी कविता या अन्य रचना के अन्त में रचनाकार का नाम लिखने से पहले रेखिका का प्रयोग किया जाता है; जैसे—
▪ शायद समझ नहीं पाओ तुम, मैं कितना मजबूर हूँ।
मन है पास तुम्हारे लेकिन, रहता इतनी दूर हूँ।
—आँकार नाथ वर्मा
8. विवरण चिह्न का प्रयोग (:-)
विवरण चिह्न (:-) का प्रयोग किसी विषय, कथन या वाक्य के बाद उसका विस्तार, विवरण या उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है। इसके बाद संबंधित जानकारी या सूची दी जाती है; जैसे—
1. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर निबंध लिखिए:—
(क) विज्ञान वरदान है या अभिशाप, (ख) भाषा और व्याकरण, (ग) देशाटन,
(घ) साहित्य और समाज, (ङ) नई कविता।
2. शिक्षक ने कहा:—“समय का सदुपयोग करना चाहिए।”
3. जीवन में सफलता के लिए तीन बातें आवश्यक हैं:—परिश्रम, अनुशासन और धैर्य।
9. अपूर्ण विराम का प्रयोग (:)
अपूर्ण विराम चिह्न विसर्ग की तरह (:) दो बिन्दुओं के रूप में होता है, इसलिए कभी-कभी विसर्ग का भ्रम होता है, फलतः इसका प्रयोग कम होता है। अपूर्ण विराम का स्वतंत्र प्रयोग किसी शीर्षक को उसी के आगे स्पष्ट करने में होता है; जैसे—
▪ कामायनी : एक अध्ययन।
▪ हिंदी व्याकरण : एक परिचय।
▪ समय : जीवन का आधार।
10. योजक चिह्न का प्रयोग (-)
इसका प्रयोग सामासिक, पुनरुक्त, युग्म तथा समतासूचक शब्दों के साथ किया जाता है;
जैसे—सुख-दुःख, बार-बार, लाभ-हानि, दिन-रात, माता-पिता आदि।
योजक चिह्न का प्रयोग निम्नलिखित परिस्थितियों में किया जाता है—
(क) दो विलोम शब्दों के बीच योजक चिह्न का प्रयोग होता है; जैसे—रात-दिन, यश-अपयश, आना-जाना।
(ख) द्वन्द्व समास के बीच योजक चिह्न का प्रयोग होता है, जैसे—माता-पिता, भाई-बहन, गुरु-शिष्य।
(ग) दो समानार्थी शब्दों की पुनरुक्ति के बीच में भी इसका प्रयोग होता है; जैसे—घर-घर, रात-रात, दूर-दूर।
11. कोष्ठक का प्रयोग ( ), { }, [ ]
कोष्ठक ( ), { }, [ ] का प्रयोग वाक्य में किसी अतिरिक्त जानकारी, स्पष्टीकरण, निर्देश या क्रम को अलग से दिखाने के लिए किया जाता है; जैसे—
(क) किसी शब्द या वाक्यांश का अतिरिक्त अर्थ या स्पष्टीकरण देने के लिए कोष्ठक का प्रयोग किया जाता है; जैसे—
▪ राम ने अपने विद्यालय (जो शहर के बीच में है) में प्रवेश लिया।
(ख) नाटक या एकांकी में पात्रों की गतिविधि अथवा मंच-निर्देश बताने के लिए कोष्ठक का प्रयोग होता है; जैसे—
▪ (राम मंच पर प्रवेश करता है।)
▪ (सभी पात्र बाहर चले जाते हैं।)
(ग) किसी सूची में उपविभाग, क्रम या विकल्प बताने के लिए कोष्ठक का प्रयोग किया जाता है; जैसे—
▪ (क) (ख)
▪ (1) (2)
▪ (i) (ii)
12. संक्षेप चिह्न का प्रयोग (॰, .)
संक्षेप चिह्न (॰, .) का प्रयोग किसी शब्द या नाम को छोटा करके लिखने के लिए किया जाता है। इसके द्वारा किसी बड़े शब्द या पद का संक्षिप्त रूप लिखा जाता है; जैसे—
▪ डॉक्टर = डॉ.
▪ प्रोफेसर = प्रो.
▪ पंडित = पं.
▪ मिस्टर = मि.
▪ मिसेज = श्रीमती / मिसेज
▪ मास्टर ऑफ आर्ट्स = एम.ए.
▪ डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी = पी-एच.डी.
नोट: संक्षिप्त रूप लिखते समय शब्द के छोड़े गए अंश को दर्शाने के लिए बिन्दु (.) का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण—डॉ., प्रो., पं., एम.ए. आदि।
13. लोप सूचक चिह्न का प्रयोग (+ × +)
लोप सूचक चिह्न (+ × +) का प्रयोग तब किया जाता है, जब किसी कविता, लेख या अवतरण का कुछ अंश छोड़कर केवल आवश्यक अंश ही प्रस्तुत किया जाता है। इससे यह पता चलता है कि मूल पाठ का कुछ भाग बीच में छोड़ दिया गया है; जैसे—
नवल किशोर नवल नागरिया।
अपनी भुजा श्यामभुज ऊपर श्याम भुजा अपने उर धरिया।
- × + × +
- × + × +
- यों लपटाय रहे उर-उर ज्यों, मरकत मनि कंचन की जरिया।
14. प्रतिशत चिह्न का प्रयोग (%)
प्रतिशत चिह्न (%) का प्रयोग किसी संख्या को 100 के आधार पर व्यक्त करने के लिए किया जाता है। इसके द्वारा किसी मात्रा, छूट, वृद्धि या कमी को प्रतिशत में बताया जाता है; जैसे—
▪ सभा में 25% स्त्रियाँ थीं।
▪ कक्षा में 80% विद्यार्थी उपस्थित थे।
▪ इस वस्तु पर 20% की छूट मिल रही है।
▪ इस वर्ष वर्षा में 15% की वृद्धि हुई।
▪ परीक्षा में राहुल ने 90% अंक प्राप्त किए।
▪30% छूट के साथ पुस्तक की 50 प्रतियाँ भेज दें।
15. समानतासूचक चिह्न का प्रयोग (=)
समानतासूचक चिह्न (=) का प्रयोग किसी शब्द का अर्थ, समान अर्थ वाले शब्द या व्याकरणिक रूप स्पष्ट करने के लिए किया जाता है; जैसे—
▪ कृतघ्न = उपकार न मानने वाला।
▪ देव + आलय = देवालय।
▪ विद्या + आलय = विद्यालय।
