करण कारक (तृतीया विभक्ति) क्या है? इसकी परिभाषा, पहचान, विभक्ति, संस्कृत एवं हिंदी उदाहरण, नियम, प्रयोग और अभ्यास प्रश्न सरल भाषा में पढ़ें। १. सूत्र- “साधकतमं करणम् कर्तृकरणयोस्तृतीया ।” नियम- जिसकी सहायता से कर्त्ता अपना कार्य पूर्ण करता है, उसमें करण कारक होता है और करण कारक में तृतीया विभक्ति होती है। इसका चिन्ह ‘से’ (with) तथा द्वारा है। जैसे- ‘सः नेत्राभ्यां पश्यति’ (वह दो नेत्रों से देखता है ।) यहाँ देखने का कार्य नेत्रों से होता है, अतः नेत्राभ्याम् में तृतीया है। २. सूत्र- “स्वतन्त्रः कर्त्ता, कर्तृकरणयोस्तृतीया ।” नियम-…
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