अपादान कारक क्या है? पंचमी विभक्ति की परिभाषा, पहचान, विभक्ति चिन्ह, नियम तथा उदाहरणों के साथ हिन्दी व्याकरण को सरल तरीके से समझें।
१. सूत्र- “ध्रुवमपायेऽपादानम् ।” (अपादाने पंचमी)
नियम- जिससे प्रत्यक्ष रूप में अथवा कल्पित रूप में कोई वस्तु अलग होती है, उसमें अपादान कारक होता है और अपादानं में पंचमी विभक्ति होती है। इसका चिन्ह ‘से’ (From) है।
जैसे- (a). वृक्षात् पर्णानि पतन्ति । (पेड़ से पत्ते गिरते हैं।)
(b). रामः गृहात् आगच्छति । (राम घर से आता है।)
यहाँ क्रमशः वृक्ष से पत्तों का और गृह से राम का अलग होना पाया जाता है। अतः ‘वृक्षात्’ तथा ‘गृहात्’ से पंचमी है।
२. सूत्र- “भीत्रार्थानां भयहेतुः।”
नियम- जिससे डरा जाता है या रक्षा की जाती है उसमें पंचमी होती है
जैसे-
डरना- साधुः पापात् विभेति । (साधु पाप से डरता है।)
रक्षा करना- वीरः नारी दुष्टात् रक्षति। (वीर दुष्ट से नारी की रक्षा करता है।)
३. सूत्र- “आख्यातोपयोगे ।”
नियम- जिससे नियमपूर्वक कुछ पढ़ा जाता है उसमें पंचमी होती है।
जैसे- (a).अहं गुरोः व्याकरंणं पठामि । (मैं गुरुजी से व्याकरण पढ़ता हूँ।)
(b).सः उपाध्यात् रामायणम् अधीते । (वह उपाध्याय से रामायण पढ़ता है।)
४. सूत्र- “वारणार्थानामीप्सितम् ।
नियम- जिससे कोई वस्तु हटाई जाती है, उसमें पंचमी विभक्ति होती है।
जैसे- सः मित्रम् पापात् निवारयति । (वह मित्र को पाप से हटाता है।)
५. सूत्र- “जनिकर्तुः प्रकृतिः।
नियम- जिसमें कोई वस्तु उत्पन्न होती है उसमें पंचमी विभक्ति होती है।
जैसे- (a). ब्राह्मणः प्रजाः प्रजायन्ते । (ब्रह्मा से प्रजा उत्पन्न होती है।) इसके अतिरिक्त तुलना करने में भी पंचमी विभक्ति होती है।
(b).रामः मोहनात् सुन्दरतरः अस्ति । (राम मोहन से अधिक सुन्दर है।)
६. सूत्र- “आडू मर्यादावचने।”
‘आ’ (पर्यत्, तक) उपसर्गयुक्त शब्दों में पंचमी विभक्ति होती है।
जैसे- आसमुद्रात् इदं मार्गम् अस्ति ।
७. प्रभृति (तब से लेकर) बहि अनन्तरम् आरभ्य तथा परम् शब्दों के योग में पंचमी विभक्ति होती है। जैसे-
प्रभृति- शैशवात् प्रभृतिः त्वम् अत्र वससि । (बचपन से लेकर तुम यहाँ रहते हो )
बहिः- ग्रामात् बहिः विद्यालयः अस्ति । (गाँव से बाहर विद्यालय है।)
अनन्तरम्- पठनात् अनन्तरम् अहं गृहं गमिष्यामि । (पढ़ने के बाद मैं घर जाऊँगा।)
आरभ्यः- तस्मात् दिनात् आरभ्यः सः तत्रैव पठति । (उस दिन से लेकरं वह वहीं पढ़ता है।)
परम्- तस्मात् विवाहात् परम् अहं विद्यालयं गमिष्यामि । (उस विवाह के बाद मैं विद्यालय जाऊँगा ।)
८. सूत्र- “पृथग्विनानानाभिस्तृतीया ऽयतरस्याम् ।”
नियम- बिना के योग में द्वितीया, तृतीया, पंचमी होती है,
जैसे- (धनं, धनेन) धनात् बिना धर्मः न भवति । (धन के बिना धर्म नहीं होता है।)
