सिरेमिस्ट बनें आज के युग में सिरामिक उद्योग अनेक दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। सिरामिक्स को मृत्तिकाशिल्प भी कहा जाता है। यह वस्तुतः क्ले से बना है। इसका आधुनिक उपयोग अकार्बनिक और अधातु पदार्थ संबंधी निर्माण कार्यों में होता है। इससे बनने वाले पदार्थ वस्तुतः उच्च ताप सहने वाले, कड़े एवं भंगुर होते हैं। ग्लास, टाइल्स, सिलिकेट, कार्बाइड ब्रिक, बोराइड, चीनी मिट्टी के बर्तन इसी श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। सिलिकेट एवं ऑक्साइड होने के कारण इसका उपयोग अर्द्धचालकों में काफी होता है जो धातु के ऑक्साइड और…
Read MoreYear: 2023
चातुर्मास व्रत: सर्वकार्य सिद्धि के लिए करें चातुर्मास व्रत
अगर पूरी श्रद्धा भक्ति से चातुर्मास के दौरान व्रत एवं भगवान श्रीहरि का पूजन किया जाये, तो उपासक के जीवन में प्रत्येक उदेश्य की पूर्ति होती है । साथ ही वह निरोगी काया भी पाते हैं हर साल आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से कार्तिक शुकल पक्ष की एकादशी तक के समय को चातुर्मास कहा जाता है । ऐसी धारणा है की इन चार महीनों मैं इंसान और भगवान का वास्तविक मिलन होता है । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन चार महीनो में शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह,…
Read MoreAshtanhika Maha Parva: शृद्धा आस्था और भक्ति का प्रतीक अष्टान्हिका महापर्व
अष्टान्हिका महापर्व क्या है? संसार सागर से पार होने के लिए नौका के समान सबल निमित्त है भक्ति। भक्ति भी वह, जो समीचीन, दृढ़ और यथार्थ हो। जैन श्रावक भक्तिभावपूर्वक अपार श्रद्धा से ‘अष्टान्हिका पर्व’ में सिद्धचक्र महामण्डल विधान करते हैं। इसे करके व्यक्ति अपने जीवन को धन्य मानते हैं। जैन श्रावक के षट्कर्तव्यों में देवपूजा मुख्य कर्तव्य है। जैनाचार्य पूज्य कुंदकंद स्वामी, समंतभद्रस्वामी, उमास्वामी, पुष्पदंत, वीरसेनाचार्य, जिनसेन आदि ने देवपूजा का विभिन्न ग्रंथों में उल्लेख किया है। देवोपासना के लिए संयमपूर्वक भक्ति एवं साधना को ही प्रशस्त माना गया…
Read Moreसुख दे वर दे हरतालिका तीज
यह व्रत कुंवारी लड़कियां इच्छित वर पाने एवं विवाहिताएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए करती हैं यह व्रत भारत वर्ष में पर्व-त्योहारों में तीन तिजें प्रमुख है – हरियाली तीज, कजली तीज और हरतालिका तीज । पर हिंदू धर्म में हरतालिका तीज की व्यापकता सबसे अधिक है और इसे काफी धूमधाम से मनाया जाता है । कहते हैं भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए पार्वती जी ने करीब सौ वर्षों तक कठिन साधना और तपस्या की । उन्होंने तीज व्रत का अनुष्ठान भी किया…
Read Moreवृक्षारोपण के लाभ पर निबंध – Benefits of Planting Trees Essay in Hindi
वृक्षारोपण के लाभ पर निबंध – Benefits of Planting Trees Essay in Hindi प्रस्तावना वृक्षारोपण पृथ्वी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वृक्षारोपण का सबसे बड़ा लाभ वातावरण के लिए है जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक होता है। इसके अलावा, वृक्षारोपण से जैव विविधता के लिए जरूरी वनों की संरचना बढ़ती है और जलवायु नियंत्रण भी सुधरता है। वृक्षारोपण के बिना हमारी पृथ्वी एक अधीर और अशुद्ध जगह बन जाती है। यह न सिर्फ जलवायु परिवर्तन को तेजी से बढ़ाता है, बल्कि धरती पर रहने वाले सभी प्राणियों के लिए…
Read Moreदृष्टांत कथा: आचरण का प्रभाव होता ही है
एक बार एक बार एक महिला संत ज्ञानेश्वर महाराज के पास अपने छोटे पुत्र को लेकर आई और उसने कहा, महाराज, इसे अपच की बीमारी है। मेने इसे कई दवाइयां दीं, किंतु उनका कुछ भी असर नहीं हुआ। ज्ञानेश्वर महाराज ने उससे कहा बहन, इसे कल ले आना। दूसरे दिन जब वह महिला अपने लड़के को उनके पास ले गई, तो उन्होंने लड़के से पूछा, ‘तू ज्यादा गुड़ खाता है ना ? बच्चे ने तुरंत सर हिलाते हुए कहा, हां। उसके द्वारा हां कहने पर उन्होंने कहा, ‘तू गुड़ खाना…
Read Moreनैतिक कहानी : फोटो खींची तो सच सामने था
घर से बाहर ऐसे ही टहल रही थी, तभी एक सत्रह – अठारह साल का लड़का मेरे पास आया और कहने लगा कि मेरे पापा बहुत बीमार हैं और उनका ऑपरेशन होना है। मगर मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि उनका इलाज करवा सकूं। मैडम अगर आप जैसे लोग कुछ मदद करें, तो शायद वे बच जाएँ। उसकी कहानी को सुन एक पल के लिए तो मैं भी भावुक हो गई थी। लेकिन पता नहीं मुझे उसकी बातों पर यकीन नहीं हो रहा था। मैंने उससे पूछा,’ क्या भीख…
Read MoreNirjala Ekadashi 2023: निर्जला एकादशी व्रत के करने से मिलता है मोक्ष
जानिए निर्जला एकादशी व्रत का महत्व सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी का सर्वाधिक महात्म्य है । इसे करने से उपासक को आरोग्य तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है । साथ ही उन्हें अकाल मृत्यु के भय से भी मुक्ति मिलती है । जेष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला एकादशी अथवा भीमसेनी एकादशी कहते हैं। एकादशी व्रत में स्नान और आचमन के अलावा जरा सा भी जल ग्रहण नहीं किया जाता है, इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। एकादशी के दिन सूर्योदय से लेकर द्वादशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान…
Read Moreनैतिक कहानी: परेशानी में ऐसी कॉल सभी को आए
नैतिक कहानी: किसी काम से मैं दूसरे शहर जा रहा था। उस दिन पहले की अपेक्षा बस स्टॉप पर भीड़ ज्यादा थी। मन में आया कि जब तक भीड़ ना छट जाए एक कप चाय ही पी ली जाए। यह सोच एक चाय की दुकान पर जा बैठा। सावन का महीना था, इसलिए हर बस में कांवड़ियों की संख्या ज्यादा थी। जितनी बसें उस समय निकाली उसमें भोले की भोले भरे थे। उनकी कावड़ बसों की छतों पर लदीं थी। करीब आधे घंटे बाद एक बस आई जिसकी सीटें खाली…
Read Moreनैतिक कहानी : अब मैंने जाना, कर भला तो हो भला
नैतिक कहानी: बात उन दिनों की है, जब मैं एम्स में अपनी किडनी के इलाज के लिए भर्ती था। क्योंकि दवा काफी महंगी थी, इसलिए मेरे पास रखे पैसे लगभग खत्म होते जा रहे थे और मैं गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था। मेरी एक दवा तो ऐसी थी कि मात्र 10 टेबलेट के लिए मुझे पंद्रह सौ रूपए चुकाने पड़ते थे। उस दिन चेकअप करने के लिए डॉक्टर साहब आए और अचानक मेरी दवा बदल दी। मेरे पास उस दवा के पंद्रह टेबलेट बचे हुए थे। मेरे तो…
Read More