होलिका दहन का विशेष महत्व- रंगो का त्योहार कहा जाने वाला होलिकोत्सव पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है । पहले दिन यानि फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका जलाई जाती है, जिसे होलिका दहन कहते हैं । मान्यता है कि इससे दुष्ट आत्माओं का नाश होता है और वातावरण में शुद्धता आती है । इस दिन छोटे बड़े सभी एक दूसरे पर रंग, अबीर और गुलाल डालकर गले मिलते हैं । पुराणों के अनुसार असुरराजा हिरण्यकशिपु की बहन, जिसे अग्नि द्वारा न जलने का वरदान प्राप्त था…
Read MoreCategory: व्रत एवं त्यौहार
चातुर्मास व्रत: सर्वकार्य सिद्धि के लिए करें चातुर्मास व्रत
अगर पूरी श्रद्धा भक्ति से चातुर्मास के दौरान व्रत एवं भगवान श्रीहरि का पूजन किया जाये, तो उपासक के जीवन में प्रत्येक उदेश्य की पूर्ति होती है । साथ ही वह निरोगी काया भी पाते हैं हर साल आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से कार्तिक शुकल पक्ष की एकादशी तक के समय को चातुर्मास कहा जाता है । ऐसी धारणा है की इन चार महीनों मैं इंसान और भगवान का वास्तविक मिलन होता है । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन चार महीनो में शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह,…
Read MoreAshtanhika Maha Parva: शृद्धा आस्था और भक्ति का प्रतीक अष्टान्हिका महापर्व
अष्टान्हिका महापर्व क्या है? संसार सागर से पार होने के लिए नौका के समान सबल निमित्त है भक्ति। भक्ति भी वह, जो समीचीन, दृढ़ और यथार्थ हो। जैन श्रावक भक्तिभावपूर्वक अपार श्रद्धा से ‘अष्टान्हिका पर्व’ में सिद्धचक्र महामण्डल विधान करते हैं। इसे करके व्यक्ति अपने जीवन को धन्य मानते हैं। जैन श्रावक के षट्कर्तव्यों में देवपूजा मुख्य कर्तव्य है। जैनाचार्य पूज्य कुंदकंद स्वामी, समंतभद्रस्वामी, उमास्वामी, पुष्पदंत, वीरसेनाचार्य, जिनसेन आदि ने देवपूजा का विभिन्न ग्रंथों में उल्लेख किया है। देवोपासना के लिए संयमपूर्वक भक्ति एवं साधना को ही प्रशस्त माना गया…
Read Moreसुख दे वर दे हरतालिका तीज
यह व्रत कुंवारी लड़कियां इच्छित वर पाने एवं विवाहिताएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए करती हैं यह व्रत भारत वर्ष में पर्व-त्योहारों में तीन तिजें प्रमुख है – हरियाली तीज, कजली तीज और हरतालिका तीज । पर हिंदू धर्म में हरतालिका तीज की व्यापकता सबसे अधिक है और इसे काफी धूमधाम से मनाया जाता है । कहते हैं भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए पार्वती जी ने करीब सौ वर्षों तक कठिन साधना और तपस्या की । उन्होंने तीज व्रत का अनुष्ठान भी किया…
Read MoreNirjala Ekadashi 2023: निर्जला एकादशी व्रत के करने से मिलता है मोक्ष
जानिए निर्जला एकादशी व्रत का महत्व सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी का सर्वाधिक महात्म्य है । इसे करने से उपासक को आरोग्य तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है । साथ ही उन्हें अकाल मृत्यु के भय से भी मुक्ति मिलती है । जेष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला एकादशी अथवा भीमसेनी एकादशी कहते हैं। एकादशी व्रत में स्नान और आचमन के अलावा जरा सा भी जल ग्रहण नहीं किया जाता है, इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। एकादशी के दिन सूर्योदय से लेकर द्वादशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान…
Read Moreरामनवमी 2023: राम में ही समाया सारा जग
भगवान श्री राम केवल भारत ही नहीं, अपितु सारे जग के आदर्श कहीं जाते हैं । उनका केवल नाम लेना ही भक्तों के सारे कष्ट हर लेता है । रामनवमी के दिन उनकी विधिवत पूजा करने से भक्तों का आत्मबल बढ़ता है रामनवमी को केवल देवी के नौवें रूप के अवतरण ही नहीं, बल्कि भगवान श्री राम के पृथ्वी पर अवतरण के दिन के रूप में भी जाना जाता है । श्री राम का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था । यह दिन नवरात्र…
Read Moreसंतान के रोग दूर करें मां शीतला
माता शीतला की विधि विधान से आराधना करने से न सिर्फ रोग दूर होते हैं, बल्कि भक्तों को निरोगी जीवन व स्वच्छता की प्रेरणा भी मिलती है चैत्र मास की कृष्ण सप्तमी और श्रावण मास की शुक्ल पक्ष तिथि को मनाई जाने वाली शीतला सप्तमी को शास्त्रों में शुभ व फलदाई माना गया है । इस पुण्यतिथि पर बच्चों में होने वाले चेचक व छोटी माता के प्रकोप से बचाने के लिए श्रद्धालु विधि-विधान के अनुसार पूजन करके उपवास रखकर प्रसन्न करने का यत्न करते हैं । मां शीतला देवी…
Read MorePapmochani Ekadashi :पापमोचनी एकादशी का महत्व व व्रत विधि
जन्म संवारे पापमोचनी एकादशी वर्ष की 24 एकादशियों में से एक पापमोचन एकादशी केवल कामना सिद्धि करने का नहीं, बल्कि पापों का शमन करने का भी अनुष्ठान है चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी पापमोचनी एकादशी के नाम से जानी जाती है । शास्त्रों में इस एकादशी को समस्त पापों और तापों से मुक्त करने वाला कहा गया है। पुराणों और स्मृतियों में भी वर्णित है कि भगवान श्री कृष्ण, अर्जुन से कहते हैं, “हे कौंतेय इस संसार में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जिसके द्वारा जाने-अनजाने में कोई पाप…
Read Moreअमला एकादशी दे पुण्य अपार – Amalaki Ekadashi Vrat in hindi
आमल की एकादशी व्रत का महत्व सभी एकादशीयों में अमला एकादशी का भी महत्वपूर्ण स्थान है । इस एकादशी को करने से न सिर्फ मार्ग की बाधाएं दूर होती है, बल्कि धन-धान्य और ऐश्वर्य भी मिलता है । भगवान श्री राम ने भी अपनी कामना की पूर्ति के लिए यह एकादशी की थी । फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी अमला एकादशी के नाम से जानी जाती है । पुराणों के अनुसार एक बार भगवान विष्णु के थूकने पर चंद्रमा के समान कांति मान बिंदु पृथ्वी पर गिर गया, जिससे…
Read MoreShattila Ekadashi: जानिए षटतिला एकादशी का महत्व और पूजाविधि
षटतिला एकादशी पर दे तिल की यज्ञ आहुति षटतिला एकादशी के दिन व्रत पूजन करने से मन के कलुषित विचार नष्ट होते हैं। इस व्रत में तिल का विशेष महत्व है। षटतिला एकादशी का महत्व माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार, यह एकादशी समस्त पापों को नष्ट करने वाली तथा दिव्य उत्कृष्ट गुणों को प्रदान करने वाली है। इस एकादशी व्रत एवं पूजन करने वाले मनुष्यों के मन के सारे कलुषित विचार नष्ट हो जाते हैं और वह राग, द्वेष रहित…
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