Spiritual Stories in hindi, आध्यात्मिक लघु कहानियां

Spiritual Stories in hindi, आध्यात्मिक लघु कहानियां

आध्यात्मिक लघु कहानी:- वह मजबूत बना है, यही विधान है एक बार भगवान शंकर व माता पार्वती टहल रहे थे । पार्वती ने अपनी शंका समाधान के लिए पूछा, ‘प्रभु क्या कारण है कि आप बने हुए को बनाते हैं और बिगड़े हुए को बिगड़ते हैं? जो पहले से ही धनवान है और उसे और अधिक धनवान बनाते हैं ।’ शंकर जी ने कहा यह बात आपको समझ में नहीं आएगी।’ पार्वती जी ने कहा, ‘भला ऐसी कौन सी बात है, जो मेरे समझ में नहीं आएगी । आप बताइए…

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आध्यात्मिक कहानी-अगर वह भिखारिन ना आती तो

आध्यात्मिक कहानी: हमारे मोहल्ले में एक भिखारिन रोज सुबह-सुबह आती है और हर घर के दरवाजे पर जाकर आवाज लगाती है। उसे मोहल्ले के हर घर से कुछ ना कुछ मिल जाता है। एक बार की बात है, हमारे पड़ोस के एक घर में भीषण चोरी हो गई। रात से ही पुलिस अपनी छानबीन कर रही थी। हर दिन की भांति वह आई और भीख मांगने लगी। लेकिन पुलिस की गाड़ी और पुलिस वालों को देख कर ठिठक गई। मैं भी अपने परिवार के साथ बाहर खड़ा था। उसने अचरज…

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नैतिक कहानी: दीपावली की खुशियां बांटूंगा

नैतिक कहानी: दीपावली की खुशियां बांटूंगा

दीपावली के मौके पर मम्मी-पापा हमेशा हिदायत देते कि पटाखे छोड़ते समय हमेशा दूसरों की सुरक्षा का ख्याल रखना चाहिए। इन बातों से बेपरवाह मेँ पटाखे हाथ में लेकर छोड़ता और कभी कभी राहगीरों पर भी पटाखे जलाकर फेंक देता था। पिछले साल मेने ऐसा ही किया था। उस रात गली में हम पटाखे छोड़ रहे थे। कुछ देर तक पापा हमारे साथ खड़े रहे और फिर हमें हिदायत देते हुए अंकल के साथ घर में चले गए। हमारे मुहल्ले में कई लोगों का आवागमन चल रहा था। तभी एक…

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नैतिक कहानी: दशहरे का मेला

नैतिक कहानी: दशहरे का मेला

दशहरे का मेला मुहल्ले के बच्चों के साथ माला भी दशहरे का मेला देखने गई। मेले में तरह-तरह के झूले व् सर्कस लगे थे। खिलौनों की दुकाने सजी हुई थी। रंग बिरंगे गुब्बारे तथा तरह-तरह की मिठाइयों से सजी दुकानें उसे बहुत अच्छी लगीं। वह चाट खाने के लिए ठेले के पास खड़ी हुई, तभी एक चोर उसका पर्स ले भागा। वह चाट भी नहीं खा पाई। सारे बच्चे जो उसके साथ गए थे, उसका साथ छोड़कर चल दिए। वे मिठाइयों, आइसक्रीम और समोसे का लुफ्त उठा रहे थे। अर्चना…

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दृष्टांत कथा: हतप्रभ हुए हनुमान

भगवान सर्वत्र व्याप्त है। यदि भावना निःस्वार्थ हो, तो प्रभु स्वयं ही भक्त के हो जाते है। ऐसा ही प्रसंग है रामायण का। जब भक्त प्रवर हनुमान संजीवनी बूटी लाने पर्वत गए थे। पर्वत की परिक्रमा पूरी करने के बाद भगवान हनुमान ने जैसे ही शीश झुकाया, उन पर आकाश से दिव्य सुगंधित पुष्पों की वर्षा होने लगी और दिव्य वाद्यों की कर्णप्रिय ध्वनि चरों ओर गूंजने लगी। उन्हें एक ममतामयी मधुर वाणी सुनाई पड़ी,’वत्स हनुमान, तुम्हारी जय हो। तुम्हारे कार्य सदा सुसम्पन्न होगें।’ हनुमान जी ने सिर उठाकर देखा…

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नैतिक कहानी: चूहा और गिलहरी

नैतिक कहानी: चूहा और गिलहरी

एक था चूहा और एक थी गिलहरी। चूहा शरारती था दिनभर ची ची करता हुआ मौज उड़ाता। गिलहरी भोली थी। टी टी करती हुई इधर-उधर घूमती रहती। एक दिन दोनों की मुलाकात हो गई। अपनी प्रशंसा करते हुए चूहे ने कहा, मुझे लोग मूषक राज कहते हैं। और गणेश जी की सवारी के रूप में जानते हैं। मेरे पैने-पैने हथियार सरीखे दांत लोहे के पिंजरे को तो क्या किसी भी चीज को काट सकते हैं। मासूम गिलहरी को यह बात सुनकर बड़ा बुरा लगा। बोली, भाई तुम दूसरों का नुकसान…

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आध्यात्मिक कहानी । गुरु नानक और सच्ची सेवा

आध्यात्मिक कहानी । गुरु नानक और सच्ची सेवा

एक बार गुरु नानक देव जी यात्रा पर निकले। इस दौरान वह एक गांव में पहुंचे। उनके साथ उनके चार प्रिय शिष्य भी थे। जब नानक जी गांव में पहुंचे, तो उनका खूब स्वागत हुआ। उसी गांव में एक गरीब महिला रहती थी। उसने नानक को शिष्यों सहित अपने घर आने का निमंत्रण दिया। नानक जी तुरंत उस महिला के घर पहुंचे। नानक को अपने घर देखकर महिला की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने बड़े प्यार से उनके लिए शर्बत बनाया। पर उसके घर छन्नी नहीं थी। इसलिए उसने…

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नैतिक शिक्षा पर आधारित एक शिक्षाप्रद कहानी । भोला और समीर

एक गांव में दो दोस्त भोला और समीर रहते थे। समीर मेहनत पर भरोसा करता था, वहीं भोला चोरी य जालसाजी से अमीर बनने के सपने देखता रहता था। एक दिन की बात है। समीर अपने खेत में सिंचाई का काम कर रहा था, तभी उसने देखा कि भोला दौड़ता हुआ गांव के समीप झाड़ियों में जा रहा है। पांच मिनट के बाद वह झाड़ियों से बाहर आया। उसके चेहरे से ऐसा लग रहा था कि किसी ने उसकी जिंदगी ही छीन ली हो। वहां से भोला तुरंत गांव की…

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नैतिक कहानी: जैसे को तैसा

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एक बार की बात है। एक गांव में गरीब किसान रामू रहता था। उसकी दो बेटियां थी। जब वह अपनी पहली पुत्री का विवाह कर रहा था, तो उसे कुछ बर्तनों की आवश्यकता पड़ी। उसने पास के एक साहूकार से किराए पर कुछ बर्तन ले लिए। विवाह के बाद उसने साहूकार के बर्तन वापस कर दिए, जिनके साथ किसान के छोटे-छोटे बर्तन भी चले गए। जब वह किसान अपने छोटे बर्तनों को लेने गया, तो साहूकार ने कहा, ‘नहीं, ये तो मेरे बर्तनों के छोटे बच्चे हैं।’ यह कहकर उसने…

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नैतिक कहानी: अंधविश्वास बनाम आत्मविश्वास

नैतिक कहानी: अंधविश्वास बनाम आत्मविश्वास

बात काफी पहले की है। मेरे गांव में एक पंडित जी रहते थे। वह हमेशा लोगों को मूर्ख बनाकर अपना उल्लू सीधा करते थे। एक दिन उन्होंने लोगों को बताया कि कल के दिन प्रातः से सायंकाल तक जो कोई भी गंगा स्नान करेगा, वह पत्थर का हो जाएगा। दूसरे दिन सुबह से ही पंडित जी और गांव वाले नदी के किनारे खड़े थे। जो कोई भी आता, उसे तुरंत रोक दिया जाता। यह कहकर कि पानी में स्नान करने से तुम पत्थर के बन जाओगे। ऐसा करते-करते दोपहर तक…

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