Gopashtami Puja (गाय पूजन): गाय की पूजा करने से मिलता है अपार पुण्य

गौ पूजन से मिले अथाह पुण्य हिंदू शास्त्रों में गौमाता को परम पूजनीय कहा गया है। दरअसल उनके पूरे शरीर में समस्त देवताओं, गंधर्वों, ऋषि-मुनियों आदि का निवास होता है। इसलिए इनकी पूजा से पुण्य मिलता है। गोपाष्टमी पूजा या गोपाष्टमी व्रत कार्तिक शुक्ल अष्टमी को मनाया जाता है। गोपाष्टमी का पर्व पूरी तरह से भगवान श्री कृष्ण और उनकी प्रिय गायों को समर्पित है। पुराणों के अनुसार गोपाष्टमी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम ग्वाले बने थे। इसलिए उनके साथ-साथ गायों की महत्ता बढ़…

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Dhanteras Upay: सुख-समृद्धि के लिए धनतेरस के दिन करें ये उपाय

धनतेरस को शुभ बनाने के लिए करें ये उपाय धनतेरस को नए बर्तन या नई चीजें खरीदने की परंपरा है। यह पर्व हमें अपनी सुख समृद्धि में बढ़ोतरी करने की शिक्षा देता है। इस दौरान यदि पूजा पाठ से संबंधित कार्य किए जाएं, तो दीपावली शुभ हो जाती है। धनतेरस दीपावली के पूर्व आने वाला ऐसा त्यौहार है, जिसमें हम अपनी सुख समृद्धि और संपन्नता में बढ़ोतरी के लिए कुछ क्रियाएं करते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि यदि धनत्रयोदशी यानी धनतेरस से लेकर दीपावली तक कुछ उपाय लगातार…

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नैतिक कहानी: दीपावली की खुशियां बांटूंगा

नैतिक कहानी: दीपावली की खुशियां बांटूंगा

दीपावली के मौके पर मम्मी-पापा हमेशा हिदायत देते कि पटाखे छोड़ते समय हमेशा दूसरों की सुरक्षा का ख्याल रखना चाहिए। इन बातों से बेपरवाह मेँ पटाखे हाथ में लेकर छोड़ता और कभी कभी राहगीरों पर भी पटाखे जलाकर फेंक देता था। पिछले साल मेने ऐसा ही किया था। उस रात गली में हम पटाखे छोड़ रहे थे। कुछ देर तक पापा हमारे साथ खड़े रहे और फिर हमें हिदायत देते हुए अंकल के साथ घर में चले गए। हमारे मुहल्ले में कई लोगों का आवागमन चल रहा था। तभी एक…

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नैतिक कहानी: दशहरे का मेला

नैतिक कहानी: दशहरे का मेला

दशहरे का मेला मुहल्ले के बच्चों के साथ माला भी दशहरे का मेला देखने गई। मेले में तरह-तरह के झूले व् सर्कस लगे थे। खिलौनों की दुकाने सजी हुई थी। रंग बिरंगे गुब्बारे तथा तरह-तरह की मिठाइयों से सजी दुकानें उसे बहुत अच्छी लगीं। वह चाट खाने के लिए ठेले के पास खड़ी हुई, तभी एक चोर उसका पर्स ले भागा। वह चाट भी नहीं खा पाई। सारे बच्चे जो उसके साथ गए थे, उसका साथ छोड़कर चल दिए। वे मिठाइयों, आइसक्रीम और समोसे का लुफ्त उठा रहे थे। अर्चना…

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शरद पूर्णिमा: अमृत बरसता है शरद पूर्णिमा की रात

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा की रात आकाश से अमृत वर्षा की बात शास्त्रों में की गई है। इस दिन लक्ष्मी पूजा के अलावा नैवेध को भी चांद की रोशनी में रखने का विधान है। दीपावली के ठीक 15 दिन पहले शरद पूर्णिमा आती है। शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि को चंद्रमा की किरणों के साथ अमृत बरसता है। इस रात धन और उन्नति की देवी लक्ष्मी पृथ्वीलोक का दौरा करती हैं और अनुकूल जगह पाकर वहां सुख समृद्धि का आशीर्वाद देती है। सूर्य के बाद चंद्रमा को सर्वाधिक प्रभावशाली ग्रह…

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दृष्टांत कथा: हतप्रभ हुए हनुमान

भगवान सर्वत्र व्याप्त है। यदि भावना निःस्वार्थ हो, तो प्रभु स्वयं ही भक्त के हो जाते है। ऐसा ही प्रसंग है रामायण का। जब भक्त प्रवर हनुमान संजीवनी बूटी लाने पर्वत गए थे। पर्वत की परिक्रमा पूरी करने के बाद भगवान हनुमान ने जैसे ही शीश झुकाया, उन पर आकाश से दिव्य सुगंधित पुष्पों की वर्षा होने लगी और दिव्य वाद्यों की कर्णप्रिय ध्वनि चरों ओर गूंजने लगी। उन्हें एक ममतामयी मधुर वाणी सुनाई पड़ी,’वत्स हनुमान, तुम्हारी जय हो। तुम्हारे कार्य सदा सुसम्पन्न होगें।’ हनुमान जी ने सिर उठाकर देखा…

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नैतिक कहानी: चूहा और गिलहरी

नैतिक कहानी: चूहा और गिलहरी

एक था चूहा और एक थी गिलहरी। चूहा शरारती था दिनभर ची ची करता हुआ मौज उड़ाता। गिलहरी भोली थी। टी टी करती हुई इधर-उधर घूमती रहती। एक दिन दोनों की मुलाकात हो गई। अपनी प्रशंसा करते हुए चूहे ने कहा, मुझे लोग मूषक राज कहते हैं। और गणेश जी की सवारी के रूप में जानते हैं। मेरे पैने-पैने हथियार सरीखे दांत लोहे के पिंजरे को तो क्या किसी भी चीज को काट सकते हैं। मासूम गिलहरी को यह बात सुनकर बड़ा बुरा लगा। बोली, भाई तुम दूसरों का नुकसान…

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आध्यात्मिक कहानी । गुरु नानक और सच्ची सेवा

आध्यात्मिक कहानी । गुरु नानक और सच्ची सेवा

एक बार गुरु नानक देव जी यात्रा पर निकले। इस दौरान वह एक गांव में पहुंचे। उनके साथ उनके चार प्रिय शिष्य भी थे। जब नानक जी गांव में पहुंचे, तो उनका खूब स्वागत हुआ। उसी गांव में एक गरीब महिला रहती थी। उसने नानक को शिष्यों सहित अपने घर आने का निमंत्रण दिया। नानक जी तुरंत उस महिला के घर पहुंचे। नानक को अपने घर देखकर महिला की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने बड़े प्यार से उनके लिए शर्बत बनाया। पर उसके घर छन्नी नहीं थी। इसलिए उसने…

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क्या है कल्पवास और उसका महत्व, मन की शुद्धि के लिए करें कल्पवास

क्या है कल्पवास और उसका महत्व

मन की शुद्धि के लिए कल्पवास कल्पवास माघ महीने में किया जाने वाला व्रत होता है, जिसका उद्देश्य अपने मन में उपस्थित विकारों को निकालना और अक्षय पुण्य की प्राप्ति है। एक महीने का यह व्रत पूरे वर्ष को पुण्य मय बना देता है। तीर्थराज प्रयाग का माघ मेला महज नदियों का ही नहीं अपितु आस्था, दर्शन, अध्यात्म और विविध संस्कृतियों का अनूठा संगम है। यह स्नान पर्व एक महीने तक चलता है। इस पर्व के दौरान संगम तट पर कल्प वास करने का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस…

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गणेश जयंती यानी तिल चतुर्थी पर गणपति को प्रसन्न कर, करे दोषों का निवारण

गणेश जयंती यानी तिल चतुर्थी । माघ मास की इस तिथि को भगवान श्री कृष्ण ने उपवास रखकर अपने ऊपर लगे आरोप के दोष से मुक्ति पाई थी। गणेश जयंती । माघ महीने की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी के रूप में जानी जाने वाली यह तिथि कई प्रदेशों में महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसे तेल चतुर्थी भी कहा जाता है। गणेश भगवान हमारे प्रथम पूज्य देवी नहीं हैं, बल्कि वह तो जीवन के हर क्षण में रचने-बसने वाले देवता कहे जाते हैं। इनकी पूजा करने से भक्तों को कोई भी विघ्न…

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