Sanskrit Essay (संस्कृत निबंध) – Sanskrit Nibandh

Sanskrit Essay (संस्कृत निबंध)

Sanskrit Nibandh – Essay In Sanskrit   Sanskrit Essay (संस्कृत निबंध) – अनुच्छेद लेखन छात्रों और शिक्षार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है। संस्कृत भाषा विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है और इसका अध्ययन न केवल शैक्षिक दृष्टि से उपयोगी है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक ज्ञान को भी समृद्ध करता है। संस्कृत निबंध लेखन (Sanskrit Essay Writing) से विद्यार्थी अपनी भाषा की समझ, लेखन कौशल और विषयों की गहराई से अभिव्यक्ति करना सीखते हैं। अनुच्छेद लेखन (Paragraph Writing in Sanskrit) भी इसी प्रक्रिया का सरल और…

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कर्म कारक – द्वितीया विभक्ति – संस्कृत में – Karm Karak in Sanskrit

कर्म कारक - द्वितीया विभक्ति - संस्कृत में - Karm Karak in Sanskrit

२. कर्मकारक (द्वितीया विभक्ति) १. सूत्र- “कर्तुरीप्सिततम कर्म कर्मणि द्वितीया” अर्थात् जिसके ऊपर क्रिया के व्यापार का फल पड़ता है, उसे कर्मकारक कहते हैं। जैसे- मैं राम को देखता हूँ। इस वाक्य में देखने के व्यापार का फल ‘राम’ पर पड़ रहा है, अतः ‘राम’ में कर्मकारक का चिन्ह ‘को’ है, किन्तु यह कभी-कभी छिपा भी रहता है। जैसे- राम पुस्तक पढ़ता है। कर्तृवाच्य में कर्मकारक में द्वितीया विभक्ति होती है। जैसे- रामः ग्रन्थं पठति । किन्तु कर्मवाच्य के कर्म में प्रथमा विभक्ति ही होती है। जैसे- रामेण ग्रन्थः पठ्यते…

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संस्कृत में कारक और विभक्ति – परिभाषा, प्रकार एवं उदाहरण

संस्कृत में कारक और विभक्ति – परिभाषा, प्रकार एवं उदाहरण

1️⃣ कारक (Karaka) परिभाषा:-  साक्षात् क्रियान्वयित्वम् कारकत्वम् अर्थात् क्रिया से साक्षात् सम्बन्ध रखने वाले विभक्ति युक्त पदों को कारक कहते हैं। जैसे- ‘श्याम’ ने विद्यालय में मोहन के लिए कलम से पत्र लिखा। इस वाक्य में लिखा’ क्रिया है। ‘श्याम’ ने इसे किया है, इसका फल, ‘पत्र’ पर पड़ा है, ‘कलम’ इसका प्रयोजन है। इस प्रकार श्याम, पत्र, कलम, विद्यालय तथा मोहन का क्रिया से साक्षात् सम्बन्ध है। अतः ये सब कारक हैं। हिन्दी कारकों की संख्या ८ है किन्तु संस्कृत में इनमें से ६ को ही कारक कहा जाता…

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