शंखपुष्पी एक औषधीय पौधा है, जिसका इस्तेमाल शारीरिक और स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए किया जाता है । यह औषधि मस्तिष्क को तर और शांत रखती है । शंखपुष्पी के कुछ और गुण शंखपुष्पी का इस्तेमाल आयुर्वेद में जड़ी-बूटी के रूप में खूब होता है । इस पौधे पर छोटे-छोटे फल लगते हैं, जिसमें काले और भूरे बीज होते हैं । आयुर्वेद में इसे पित्तनाशक, पाचक और स्मृतिवर्धक माना गया है । इसके अलावा इसे उदर रोग, उच्च रक्तचाप, हिस्टीरिया, उन्माद सूखा रोग, मूत्र विकार एवं सिरदर्द आदि…
Read Moreजानिए भगवान हनुमान जी की पूजा का महत्व
कपि संकट मोचन नाम तिहारो भगवान हनुमान की पूजा करने से भक्त को सूर्य का तेज, श्री राम का व्यक्तित्व और शनिदेव जैसा जुझारूपन मिलता है । साथ ही भक्त का आत्मबल भी बढ़ता है आदि काल से ही पूजा पाठ में हनुमान जी का विशेष महत्व है, क्योंकि हनुमान जी ही कलयुग के प्रत्यक्ष देवता और संकट मोचन हैं । सारे देवताओं में इनकी महिमा इसलिए अधिक है, क्योंकि यह सदैव अपने भक्तों के समीप रहकर उनकी प्रार्थना को सहर्ष स्वीकार करते हैं । हनुमान उत्तम सेवक, कुशल नीतिज्ञ…
Read Moreएकांत में मिले आत्मसाक्षात्कार
ध्यान करना सेहत के लिए काफी लाभदायक माना गया है । जो व्यक्ति ध्यान करते हैं, उन्हें चमत्कारी अनुभव भी होते हैं । अक्सर साधक परमानंद, दिव्य दृष्टि, स्वर्गीय उड़ान जैसी अनुभवों को प्राप्त करते हैं । कई बार मोक्ष की सिद्धि में लगे बुद्धिमार्गीय साधकों को भी प्रकाश ध्वनि से जुड़े कई चमत्कारी भ्रम घेर लेते हैं । फलतः कुछ साधक तो ध्यानमार्ग छोड़कर इन अनुभवों की खोज करते भटक जाते हैं । जगत के सृजनात्मक-अनुसंधान में लगा कोई भी व्यक्ति इन चमत्कारों से आकर्षित नहीं होता । आत्म…
Read Moreजानिए भगवान विश्वकर्मा को निर्माण एवं संरचना का स्वामी क्यों माना जाता है
भगवान विश्वकर्मा को निर्माण एवं संरचना का स्वामी माना जाता है, उन्हें देव शिल्पी भी कहा जाता है । जीवन को सुखी बनाने वाले निर्माण सिद्धांतों का वास्तु शास्त्र उन्हीं की देन है सारा संसार चलाते हैं विश्वकर्मा देव लोक के शिल्पी विश्वकर्मा जी का प्रादुर्भाव प्राचीन काल से माना जा रहा है । जब नारायण की नाभि से ब्रह्माजी हुए और उन्हों ने सृष्टि की रचना की । तभी ब्रह्मा जी के पुत्र धर्म हुए और धर्म के सातवे पुत्र के पुत्र स्वयं विश्वकर्मा जी हुए । पुराणों में…
Read Moreशनि की साढ़ेसाती कष्टदायी, फिर फलदायी
शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव अगर कुंडली में शनि की साढ़ेसाती चल रही हो, तो यह आपकी परीक्षा का समय है । शनि आपकी परीक्षा लेकर आपको और मजबूत बनातें हैं शनि ग्रह का नाम सुनते ही हमारे भीतर एक डर व्याप्त हो जाता है । फिर जब कुंडली में शनि कि ढैया या साढ़े साती का चक्र चलने की बात ज्योतिष करतें हैं, तो लोग और अधिक भयाक्रांत हो जातें है । लेकिन कई बार मनीषियों ने यह साबित किया है कि शनि भगवान जितने डरावने या क्रूर प्रतीत…
Read Moreपक्षियों से जुड़े शकुन अपशकुन विचार
जानिए पक्षियों से जुड़े शकुन-अपशकुन विचार पक्षियों का किसी मौके पर दिखाई देना हमारे लिए शुभ या अशुभ हो सकता है । पक्षियों की चहचहाहट सभी को पसंद आती है । ज्योतिष शास्त्र में पक्षियों का महत्व बताया गया है । यानी इनका किसी मौके पर दिखाई देना हमारे लिए शुभ भी हो सकता है अशुभ भी । पक्षी शकुन विचार अपशकुन नहीं, शुभ होता है उल्लू, ज्योतिषीय दृष्टिकोण से लक्ष्मी का वाहन उल्लू उपेक्षा नहीं बल्कि सम्मान का प्रतीक माना जाता है । ● यदि किसी किसान के कोठार…
Read Moreगायत्री मंत्र के लाभ । Benefits of Gayatri mantra in hindi
गायत्री मंत्र के विषय में:- भारत भूमि ऋषियों और तपस्वियों की भूमि रही है । इस धरती पर समय-समय पर महान ऋषि और मुनियों ने तप किये और भारत को अद्वितीय गरिमा प्रदान की है । विश्व में यही ऐसा देश है जो कि मंत्र तथा जप के लिए जाना जाता है । अनेक मंत्र है यहां और मंत्र जप हमारी सनातन धार्मिक परंपरा भी रही है । अभी तक हम मंत्र तथा जपों को ईश्वरीय साधना का केवल एक मात्र साधन ही मानते रहे हैं किंतु ये मंत्र अपने…
Read MoreVastu tips for guest room : वास्तु अनुसार ही बनाएं मेहमानों का कमरा (गेस्ट रूम)
गेस्ट रूम वास्तु टिप्स : घर हो या ऑफिस गेस्ट रूम को कमतर नहीं आंका जा सकता है । यदि इसकी दिशा और स्थान सही है, तो मेहनत और मेजबान दोनों की मानसिक दशा ठीक रहती है गेस्ट रूम किसी भी ऑफिस या घर का मुख्य कक्ष होता है । दरअसल यह वह जगह होती है, जहां अतिथि आकर आपसे मिलते हैं या रहते हैं । लेकिन कई बार गेस्ट रूम विवाद की जगह भी बन जाती है । लिहाजा गेस्ट रूम यानी अतिथि कक्ष कहां और किस तरह का…
Read Moreटोपाज रत्न के फायदे
टोपाज करें हर मुश्किल आसान बाइबल के पलायन खंड अर्थात बुक ऑफ एक्सोडस में बड़े पुजारियों द्वारा जो रत्नजड़ित पट्टिका वक्ष स्थल पर पहनी जाती थी, उसमें 12 रत्न होते थे, जिसमें टोपाज भी एक था । यह रत्न स्वर्गद्वार की रक्षा करने वाले बारह शक्तिशाली फरिश्तों के लिए भी अत्यंत पवित्र माना जाता था । बाघ की आंख (टाइगर्स आई) नामक रत्न के साथ उसके बराबर के टोपाज को पहनने से धन दौलत में भी वृद्धि होती है । आजकल टोपाज का कई और उद्देश्यों की पूर्ति के लिए…
Read Moreरोग सताए, तो मंत्र से भगाएं
शास्त्रों में उल्लिखित मंत्रों से भगवान की पूजा के साथ-साथ कुछ मंत्रों गंभीर रोगों में भी लाभ होता है । सिर दर्द हो या ह्रदय रोग, मंत्रों में हर रोग को दूर करने की क्षमता होती है । ‘तंत्रासार’ में कहा गया है, जिसके मनन से मनुष्य का उद्धार होता है, उसे ‘मंत्र’ कहते हैं । शब्द को शास्त्रों में ब्रह्म कहा गया है अर्थात महा उर्जा का स्त्रोत । साधारण शब्दों के मुकाबले मंत्रों की शक्ति काफी अधिक होती है । तथा इनका प्रभाव भी अधिक होता है ।…
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