गायत्री मंत्र के लाभ । Benefits of Gayatri mantra in hindi

गायत्री पुरश्चरण के द्वारा माँ गायत्री के दर्शन

गायत्री मंत्र के विषय में:- भारत भूमि ऋषियों और तपस्वियों की भूमि रही है । इस धरती पर समय-समय पर महान ऋषि और मुनियों ने तप किये और भारत को अद्वितीय गरिमा प्रदान की है । विश्व में यही ऐसा देश है जो कि मंत्र तथा जप के लिए जाना जाता है । अनेक मंत्र है यहां और मंत्र जप हमारी सनातन धार्मिक परंपरा भी रही है । अभी तक हम मंत्र तथा जपों को ईश्वरीय साधना का केवल एक मात्र साधन ही मानते रहे हैं किंतु ये मंत्र अपने…

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बसंत पंचमी के दिन पीले फूलों से करें मां सरस्वती की पूजा

“बसंत पंचमी के दिन पीले फूलों से करें मां सरस्वती की पूजा”

जानिए बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा क्यों की जाती है ।     बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से उपासक कुशाग्र बुद्धि के होते हैं और माता की प्रेरणा से उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में कई परेशानियों पर विजयश्री मिल जाती है । पूजन में सरस्वती जी को समर्पित मंत्रों का जोर से उच्चारण भी करना चाहिए विद्या की देवी सरस्वती अध्ययन के साथ-साथ कला व संगीत की भी अधिष्ठात्री हैं । यदि किसी मुर्ख पर भी उनकी कृपा बरस जाए, तो वह व्यक्ति…

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करे सूर्य की पूजा होंगे तेजस्वी

सूर्य पूजा

सूर्य पूजा करने से साधक न सिर्फ तेजस्वी होता है । बल्कि अनेक व्याधियों से मुक्त भी हो जाता है । सूर्य भगवान की आराधना के कई फायदे हैं । हिन्दू धर्म के शक्तिशाली देवताओं में इन्हें शामिल किया जाता है, साथ ही योग क्रियाओं में भी उनका महत्व है । सूर्य पूजा काफी प्रभावशाली है । इन देव की नियमित पूजा-अर्चना करने से साधक को यश मिलने के साथ-साथ उसका तेज भी बढ़ता है । जो लोग अच्छा स्वास्थ्य, अच्छी दृष्टि, सफलता और उत्साह की कामना करते हैं और…

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उपासना क्या है : उपासना सिद्धांत

Meditation

क्या है उपासना-   उपासना का मतलब किसी से ज्ञान प्राप्त करने के लिए छोटा आसन लेकर उसके पास बैठना नहीं, बल्कि विचार वह भावना के द्वारा मनन करना ही उपासना है । उपासना का मुख्य उद्देश्य मोक्ष प्राप्त करना होता है । कोई भी उपासना तभी फलदाई होती है, जब उसमे पूरे नियमों का पालन किया गया हो । सामान्य रूप से अखंड चिंतन में मग्न रहने वाले तथा सर्वसंग परित्याग करके विश्व हित के कार्यों में रत सत्पुरुष की उपासना अभ्युदय एवं मोक्ष मार्ग की तरफ ले जाती…

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सूर्य पूजा से मिलेगा सौभाग्य और तेज

Sun Prayer

सूर्य पूजा के लाभ   सूर्य की विभिन्न तरह से पूजा की जा सकती है । इनकी पूजा से भक्तों को आरोग्यता भी मिलती है और तेजस्विता भी बढ़ती है। इनके मंत्र सौभाग्य लाने में प्रभावशाली हैं । आदि काल से भारतीय संस्कृति में सूर्य की पूजा अर्चना की जाती है, जिससे मनुष्य के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है । पूजा का मुख्य उद्देश्य शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक उन्नति तथा आरोग्य की प्राप्ति था । आयुर्वेद के श्रेष्ठ आचार्य महर्षि चरक ने भी दैवी चिकित्सा के अंतर्गत सूर्य उपासना को…

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मंत्र जप करने का सही समय क्रम

मंत्र जप करने का सही समय क्रम

जानें, मंत्र जप की गणना कैसे करें जप की सामान्य गड़ना के अनुसार एक समय सरणी तैयार की गई है । मंत्र जप करते समय हम इस सरणी से के अनुसार हम यह ज्ञात कर सकते है कि हमारी निर्धारित जप संख्या कितने समय में पूरी कर सकते है । इस लिए यह जप का समय क्रम साधक लिए बहुत उपयोगी है । बैखरी, उपांशु, मानसिक तीनो प्रकार का जप निम्न प्रकार निर्धरित किया गया है । जप का समय क्रम संख्या मंत्र प्रति मिनट की गति जप की संख्या…

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बीजाक्षर मंत्रों के विषय में

About beej mantra in hindi

बीज अक्षर बड़े शक्तिशाली होते है । प्रत्येक देवता का अलग बीज अक्षर होता है । क्रीं भगवान श्री कृष्ण का बीज अक्षर है । बंगाल के लोग इसका उच्चारण क्लोंड. और मद्रास के लोग क्लीम करते है । रां श्री राम चंद्र जी का बीज अक्षर है । ऐं सरस्वती जी का बीज अक्षर है । क्रीं काली जी का , गं गणेश जी का स्वं कार्तिकेय का, हौम भगवान शंकर का, श्रीं माता लक्ष्मी जी का, डुं माता दुर्गा का, ह्रीं माया का, इसी को तांत्रिक प्रणव भी…

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साधना प्रकरण में जप की संख्या का महत्व

साधना प्रकरण में जप की संख्या का महत्व

प्रत्येक व्यक्ति अनजाने में ही सोअहं मन्त्र २४ घंटो २२६०० बार जपता है । तुम्हे ऐसी प्रत्येक श्वास के साथ अपना इष्ट मंत्र कहना चाहिए । बस फिर क्या, तुम्हारी मन्त्र-शक्ति खूब बढ़ जाएगी और तुम्हारा मनशुद्ध हो जाएगा । तुम्हे जप संख्या २०० से लेकर 500 माला तक प्रतिदिन बढानी चाहिए । जैसे तुम दो बार भोजन करने के लिए उत्सुक रहते हो वैसे ही दिन में चार बार जप करने क लिए भी उत्सुक रहना चाहिए । मृत्यु किसी भी समय आ सकती है ओऱ उसका आगमन असूचित…

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लिखित जप के लाभ । Benefits of likhita japa in hindi

Benefits of likhita japa in hindi

जानें, लिखित जप किसे कहते है और उसके नियम व लाभ क्या है लिखित जप:-प्रतिदिन अपना गुरु मन्त्र अथवा इष्टमंत्र अपनी नोट बुक लिखने को हम लिखित जप कहते है । मनुस्मृति में जप करने के जो भिन्न-भिन्न उपाय बताए गए हैं, उनमें लिखित जप का प्रभाव सबसे अधिक होता है । लिखित जप चित्त क़ो एकाग्र करने में सहायता करता है और धीरे-धीरे साधक क़ो ध्यान की ओर अग्रसर कराता हैं । लिखित जप में प्रतिदिन अपना गुरु मन्त्र अथवा इष्टमंत्र अपनी नोट बुक में लिखो । इस अभ्यास…

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जप में कुम्भक और मूलबंध की आवश्यकता

जप में कुम्भक और मूलबंध की आवश्यकता

जब तुम जप करने के जिए बैठते हो तो सिद्धासन लगाओ और मूलबन्ध का अभ्यास करों । इससे चित्त कों एकाग्र करने में सफलता मिलती है । यह अभ्यास अपान वायु को नीचे को ओर आने से रोकता है । पद५मासन पर बैठने का अम्यास होने से तुम साधारण रूप से मूल-बंध कर सकते हो । जितनी देर हो सके, सुगमतापूर्वक मूलबन्ध का अभ्यास करो । श्वास के रोकने की क्रिया को कुम्भक कहा जाता है । कुम्भक के अभ्यास से चित्त दृढतर बनता जता है और एकाग्रता का स्वत:…

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