आयुर्वेद के दृष्टिकोण से आंवला को अमृत के समान माना जाता है । इसे बुद्धि, स्मरण शक्ति तेज करने, स्फूर्ति दाई, इंद्रियों को सफल करने में उपयोगी माना जाता है । इसके अलावा आवलें में कई और भी गुण होते हैं । यह खाने में कड़वा लगता है, लेकिन इसके गुण मिठास भरे होते हैं । आंवले का सेवन कई रूपों में किया जाता जा सकता है । जैसे कि जूस, मुरब्बा, चटनी आदि आंवला खाने के लाभ * आंवले में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होती है, जिससे यह…
Read Moreनैतिक कहानी: राधिका की शिकायत
हाथों में फूलों का गुलदस्ता थामते हुए मन्नू ने कहा, ‘हैप्पी मदर्स डे । मम्मा !’ थैंक्यू बेटा, मां ने प्यार से कहा और बोली, ‘बिलकुल मुझ पर गया है । एक आप हैं, पिछले दस साल से एक फूल भी मुझे भेट नहीं किया ।’ राधिका की बात को बिल्कुल अनसुना करते हुए जे के ने चाय की चुस्की ली और अख़बार से बिना नजरें हटाए बोले, ‘हूं ।’ राधिका सोफे से उठी और खिड़की के परदे हटाने लगी । तभी उसकी नजर सामने वाले मकान में बालकनी पर…
Read Moreआदि गुरु शंकराचार्य का जीवन परिचय – Biography of Adi Guru Shankaracharya in Hindi
अद्वैत के संस्थापक आदि गुरु शंकराचार्य वैदिक धर्म तथा संस्कृति के उद्धारक आदि शंकराचार्य ने उपनिषद, ब्रह्मसूत्र तथा गीता पर भाष्य लिखकर सम्पूर्ण जनमानस को धर्म का यथार्थ रूप समझाया है । ज्ञान के साथ भक्ति का आविष्कार भी हम उनके जीवन में देख सकते है । उनकी दिव्य वाणी आज भी सभी को नई शक्ति तथा प्रेरणा देती है । उनका जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी को अद्रा नक्षत्र में दक्षिण भारत के केरल राज्य के कालड़ी नामक ग्राम में ७८८ ईस्वी में ब्राह्मण दंपत्ति विशिष्टा और विश्वगुरु के घर…
Read Moreआध्यात्मिक दृष्टांत: विचारों में आज भी हैं रामकृष्ण परमहंस
रामकृष्ण परमहंस एक महान संत एवं विचारक थे । बचपन में ही इन्हें विश्वास था कि ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं, इसलिए इन्होंने ईश्वर की प्राप्ति और साधना में सारा जीवन बिता दिया । रामकृष्ण मानवता के पुजारी थे और इनका मानना था कि सभी धर्मों कि मंजिल एक ही हैं, बस रस्ते अलग-अलग हैं । बचपन से ही माँ जगदम्बा के दर्शन करने उत्कट कामना इनमे उत्पन्न हो गई थी । वे दिन रात देवी की आराधना व ध्यान करते और देवी के दर्शन के लिए फुट फुट…
Read Moreनैतिक कहानी: बड़बोला दूधवाला चुप रह गया
हमारे एक पड़ोस के ताऊ जी सरकारी सेवा से अवकाश प्राप्त है । वह हमेशा कहते हैं कि जब तक जेब में छह हजार रूपए नहीं रहते, मुझे चैन नहीं रहता । लिहाजा हमेशा उनकी जेब में इतने रूपए मौजूद रहते । कई लोगो को समय पड़ने पर वह मदद भी कर देते थे । इसलिए हमें भी उनकी यह आदत बुरी नहीं लगती थी । एक दिन सुवह जब हम दुध लेने दूधवाले के पास पहुंचे, तो वह भेस दुहने की तयारी कर रहा था । हमारे पहुँचते ही…
Read Moreदुर्भाग्य एक प्रेरणादायक कहानी
आज राधेश्याम बहुत खुश था । उसे बहुत दिनों के बाद मेहनत का फल मिल गया था । उसे बाराणसी के एक विद्यालय में बतौर अध्यापक निक्युत कर लिया गया था । राधेश्याम की ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था । अगले ही दिन वह अपनी माँ से आशीर्वाद लेकर मंजिल की और चल पड़ा । वह वाराणसी जाने वाली बस में सवार हो गया । तभी रस्ते में बस की टक्कर एक ट्रक से हो गई अन्य यात्री के साथ राधेश्याम को भी चोटें आयीं । जब उसे होश…
Read Moreपरीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए करें ये उपाय
पढ़ाई में जुट जाएं, वास्तु से मदद पाएं बच्चों की परीक्षाएं शुरू होने वाली है । ऐसे में पढ़ाई करना बहुत जरूरी है, साथ ही आवश्यक है वातावरण को अनुकूल बनाने का प्रयास करना । विशेषकर इन दिनों बच्चों को अध्ययनरत रखने के लिए आप घर में कुछ वास्तु सम्मत उपाय कर सकते हैं, ताकि बच्चों के प्राप्तांक बढ़िया हों परीक्षा के दिन करीब है । ऐसे में परीक्षा फोबिया या किसी और वजह से बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता है । पर यदि उचित समय में आप…
Read Moreलक्ष्मी आती है दक्षिणावर्ती शंख से
दक्षिणावर्ती शंख के फायदे पुराणों एवं शास्त्रों में शंख को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है । आज भी पूजा-पाठ के दौरान शंख रखने का प्रचलन है । कई घरों में संध्या काल में शंख बजाने की भी परम्परा है । हमारे आसपास कई तरह के शंख प्रचलित है । पर मुख्य रूप से शंख दो प्रकार के माने गए हैं । पहला शंख वह है, जो पूजा-पाठ के दौरान उपयोग में लाया जाता है और दूसरा शंख वह है, जिसे पूजा स्थान पर रखा जाता है । ऐसे शंखो में…
Read Moreआध्यात्मिक कहानी । और देवी पार्वती चुप हो गईं
एक बार शंकर जी और माता पार्वती स्वर्ग की सैर पर निकले । पार्वती जी ने दूर एक आदमी को भूख से तड़पते देखा । उसे तड़पते हुए देखकर भी भगवान शंकर आगे बढ़ गए । पार्वती जी से रहा नहीं गया । उन्होंने इस पर प्रश्न किया कि आखिर क्यों भगवान शंकर ने उस आदमी के प्रति दया नहीं दिखाई जबकि उन्हें तो करुणा का सागर कहा जाता है । शंकर भगवान बोले, ‘तुम जानती नहीं हो, देवी । मनुष्य की आदत है अपने मन के बहकावे में आ…
Read Moreशिक्षाप्रद कहानी । ज्ञान निधि का संरक्षण धर्म है
ह्वेनसांग भारत का परिभ्रमण कर जहाज से वापस चीन जा रहा था । उसेके साथ ग्रंथों से भरी एक पेटिका भी थी । जहाज अभी कुछ ही दूर गया था की तूफान मैं फंस गया । जहाज के डगमगाने पर प्रधान नाविक ने यात्रिओं से फालतू सामान बिना देर किये समुद्र में फेकने की अपील की । तत पश्चात नाविक ने ह्वेनसांग को भी उसे पेटिका को फेकने को कहा । ह्वेनसांग असमंजस में पड़ गया क्योंकि यह उसकी भारत यात्रा की एक मात्र पूंजी थीं । इसलिए उसने उस…
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