बात काफी पहले की है। मेरे गांव में एक पंडित जी रहते थे। वह हमेशा लोगों को मूर्ख बनाकर अपना उल्लू सीधा करते थे। एक दिन उन्होंने लोगों को बताया कि कल के दिन प्रातः से सायंकाल तक जो कोई भी गंगा स्नान करेगा, वह पत्थर का हो जाएगा। दूसरे दिन सुबह से ही पंडित जी और गांव वाले नदी के किनारे खड़े थे। जो कोई भी आता, उसे तुरंत रोक दिया जाता। यह कहकर कि पानी में स्नान करने से तुम पत्थर के बन जाओगे। ऐसा करते-करते दोपहर तक…
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नैतिक कहानियां एक ऐसी कहानी होती हैं, जो एक नैतिक सन्देश या सीख देती हैं। इन कहानियों का मुख्य उद्देश्य लोगों को सही और गलत के बीच अंतर समझाना होता है। इन कहानियों के माध्यम से, लोग नैतिक मूल्यों और आदर्शों के बारे में सीखते हैं, जो उन्हें एक अच्छे व्यक्ति बनने में मदद करते हैं।
नैतिक कहानियों में कुछ चरित्र होते हैं, जो दूसरों की सहायता करने या अपनी गलतियों से सीखने के माध्यम से समस्याओं का सामना करते हैं। इन कहानियों के माध्यम से, लोग सच्चाई, ईमानदारी, समर्पण, न्याय और संवेदनशीलता जैसे नैतिक मूल्यों के बारे में सीखते हैं। ये कहानियां बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी भी उम्र के लोगों को नैतिकता की महत्वपूर्णता के बारे में समझाने के लिए बहुत उपयोगी होती हैं।
नैतिक कहानियां जीवन के असली मूल्यों को समझाने का एक अच्छा माध्यम होती हैं जो हमें अपनी सोच और व्यवहार के बारे में सोचने पर मजबूर करती हैं। इन कहानियों से हम सीखते हैं कि सच्चे नैतिक मूल्य क्या होते हैं और उन्हें अपने जीवन में कैसे उतारा जाए।
नैतिक कहानियां आमतौर पर उस समय सुनाई जाती हैं जब हम अपने आसपास कुछ नेताओं और नैतिक आदर्शों को खो चुके होते हैं। इन कहानियों से हम सीखते हैं कि अगर हम नैतिक वृद्धि करना चाहते हैं तो हमें अपने स्वयं के विकास पर ध्यान देना होगा। इन कहानियों में व्यक्ति को नैतिक तथा दायित्वपूर्ण भूमिकाओं का पालन करने का जीवन में महत्व बताया जाता है।
नैतिक कहानियां सभी उम्र के लोगों के लिए उपयोगी होती हैं। इन कहानियों के माध्यम से हम नैतिक और दायित्वपूर्ण आदर्शों का समझ पाते हैं, जिससे हमें अपने जीवन में सफलता हासिल करने में मदद मिलती है। इन कहानियों के माध्यम से हम नैतिकता, समझदारी, सामाजिक जवाबदेही, और विश्वासघात से बचने के तरीकों को सीखते हैं।
नैतिक कहानियों का महत्व इस बात में है कि वे हमें सच्चाई के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को समझने और उन्हें अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करती हैं।
A beggar story : झूठा भिखारी और दान
गली में जोर-जोर से भिखारी चिल्ला रहा था, ‘मेरी मदद करो, गरीब की मदद करो, अल्लाह तुम्हें बहुत देगा।’ कुछ औरतें घर से आटा, पैसा लेकर बाहर आई और भिखारी को देने लगीं, परंतु उसने आटा पैसे लेने से इंकार कर दिया। सब आश्चर्य से उसे देखने लगे। वही नुक्कड़ पर चार-पांच युवक खड़े थे। भिखारी के आटा-पैसे न लेने पर वह भी उसे देखने लगे। फिर उन्होंने भी उसे लेने को कहा, किंतु उसने कुछ भी नहीं लिया। तब एक लड़के ने पूछा, ‘तो तुम्हें क्या चाहिए बाबा ?’…
Read Moreनैतिक कहानी: आदतों को कैसे लगा देती आग
आदतों को कैसे लगा देती आग, एक बूढी मां की कहानी बात हमारे शहर के ही एक घर की है। घर के मुखिया के गांव में देहांत के बाद बेटा अपनी मां को शहर में अपने घर ले आया। पति के अचानक चले जाने से गांव के उस हवेली नुमा मकान में अम्मा का जीवन दुष्कर हो गया था। पर बेटे ने मां की चिंता की और वह उन्हें अपने साथ शहर ले आया। अम्मा को लगा केवल जगह ही बदल गई है। भले ही यह उनके पति का घर…
Read Moreनैतिक कहानी: घर की रोटी
‘देवदास बने बैठे हो।’ साथी ने धौंस जमाते हुए पूछ। उसने आंखें ऊपर उठाई डबडबाई आंखें देखकर धौंस जमाने वाला सकते में आ गया। उसने तुरंत पूछा, ‘क्या हुआ?’ ‘कुछ नहीं यार! इसी गाड़ी से उतरा हूँ। उतरते-उतरते रोटियों की यह पोटली उठा लाया हूँ।’ ‘रोटियों की पोटली?’ कहकहा लगाना चाहता था, वह, पर स्थिति भांपते हुए यह कहते-कहते रुक गया कि पॉकेट मारी छोड़कर भिखारियों वाला धंधा कब से अपना लिया? अपना दर्द उलीचते हुए वह बोला, ‘सालों बीत गए, मां के हाथ की बनी भीनी-भीनी सुगंध वाली रोटियां…
Read MoreHindi Moral Story : कुत्तों ने बचाया
शास्त्रों में कहा गया है, असहाय, निर्बल एवं कमजोर की सहायता करनी चाहिए और पशु-पक्षियों को खिलाना चाहिए। इससे कल्याण होता है। एक दिन मैं किसी काम से बुलंदशहर गया था मुझे वहां शाम हो गई और रात वहीं पर बितानी थी। लिहाजा मैंने अपने दोस्त का मोबाइल नंबर मिलाया और पता पूछ कर उसके घर की ओर चल पड़ा। क्योंकि उसका घर ज्यादा दूर नहीं था, इसलिए मैंने पैदल ही चलने का निश्चय किया। शाम के सात बज चुके थे और अंधेरा हो चला था। उसके बताए पते पर…
Read Moreनैतिक कहानी: राधिका की शिकायत
हाथों में फूलों का गुलदस्ता थामते हुए मन्नू ने कहा, ‘हैप्पी मदर्स डे । मम्मा !’ थैंक्यू बेटा, मां ने प्यार से कहा और बोली, ‘बिलकुल मुझ पर गया है । एक आप हैं, पिछले दस साल से एक फूल भी मुझे भेट नहीं किया ।’ राधिका की बात को बिल्कुल अनसुना करते हुए जे के ने चाय की चुस्की ली और अख़बार से बिना नजरें हटाए बोले, ‘हूं ।’ राधिका सोफे से उठी और खिड़की के परदे हटाने लगी । तभी उसकी नजर सामने वाले मकान में बालकनी पर…
Read Moreनैतिक कहानी: बड़बोला दूधवाला चुप रह गया
हमारे एक पड़ोस के ताऊ जी सरकारी सेवा से अवकाश प्राप्त है । वह हमेशा कहते हैं कि जब तक जेब में छह हजार रूपए नहीं रहते, मुझे चैन नहीं रहता । लिहाजा हमेशा उनकी जेब में इतने रूपए मौजूद रहते । कई लोगो को समय पड़ने पर वह मदद भी कर देते थे । इसलिए हमें भी उनकी यह आदत बुरी नहीं लगती थी । एक दिन सुवह जब हम दुध लेने दूधवाले के पास पहुंचे, तो वह भेस दुहने की तयारी कर रहा था । हमारे पहुँचते ही…
Read MoreNaitik Kahani । मछली की चतुराई
तालाब में ढेर सारी मछलियां रहती थी । एक दिन अचानक वहां एक बगुला आ गया और उसने झटपट कई मछलियों का शिकार कर लिया । यह देखकर मछलियों में हड़कंप मच गया । सारी मछलियां भयभीत हो गयीं । सारी मछलियां शाम को एकत्रित हुए और उस बगुले से छुटकारा पाने का उपाय सोचने लगी । तभी सुकन्या नाम की एक छोटी मछली ने कहा, ‘मेरे पास बगुले को भगाने का आईडिया है ।’ पूछने पर उसने अपनी योजना कह डाली । अगली सुबह जब बगुला खुशी से मछलियां…
Read Moreनैतिक कहानी : चाय की केतली
एक लड़का था । उसके माता-पिता बचपन में ही गुजर गए थे । वह अपनी नानी के पास रहता था । उसकी नानी ने उसका पालन-पोषण किया था । वह थोड़ा बड़ा हुआ तो मेहनत करके घर में कुछ पैसे लाने लगा । वह बहुत मेहनती था । अपनी मेहनत की कमाई से वह घर में कई चीजें ले आया । अब उनके घर में हर चीज थी । नानी और वह आराम से रहने लगे । उनके इलाके में एक चोर सब कुछ देखता रहता था । उसकी नजर…
Read More3 Short Moral Stories in Hindi
नैतिक कहानी: मैं किसान का बेटा हूं, वह पीएम का ——*—— इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ग्लैडस्टन एक किसान के पुत्र थे । वह अत्यंत सादा जीवन व्यतीत करते थे । वह अपने कपड़े भी खुद ही साफ करते थे । एक बार वे रेल में सफर कर रहे थे । एक स्टेशन पर एक अखबार का संपादक उनसे मिलने आया । उसका ख्याल था कि प्रधानमंत्री अवश्य ही प्रथम श्रेणी के डब्बे में होंगे । इसलिए उसने प्रथम श्रेणी के तीन डिब्बों में उनकी खोज की, पर वे नहीं मिले ।…
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