जन्माष्टमी के दिन पूरी श्रद्धा एवं विधि विधान से भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं । श्री कृष्ण केवल आदिदेव ही नहीं वरन पूरे ब्रह्मांड के पोषक श्री विष्णु जी के साक्षात अवतार भी हैं, इनके हर रूप में सूर्य, जल, वायु, आकाश और पृथ्वी का समावेश है, इसलिए इनकी पूजा-अर्चना से भक्तों को परम शांति, सुख, धैर्य एवं अलौकिक आनंद की अनुभूति होती है । कृष्ण जन्माष्टमी व्रत पूजन विधि व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर दैनिक क्रियाओं से…
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जन्माष्टमी पर करें राशि के अनुसार कृष्ण का श्रृंगार
जन्माष्टमी में अगर आप अपनी राशि के अनुसार भगवान का श्रृंगार करते हैं, तो आप भगवत कृपा के पात्र होंगे । जैसे ही मनुष्य का जन्म होता है उस पर ग्रहों का प्रभाव शुरू हो जाता है, जिनसे उसकी हर गतिविधि प्रभावित होती है । पूजा अर्चना में आराध्य देवता के साथ ग्रहों की प्रसन्नता भी जरूरी है, तभी उसका संपूर्ण पुण्य लाभ भी मिलता है । इसलिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर यदि हर भक्त अपनी राशि के अनुसार राशि के रंग के वस्त्रों से भगवान का…
Read MoreMangala Gauri vrat : मंगला गौरी व्रत का महत्व व व्रत विधि
मंगल दोष दूर मंगला गौरी व्रत से श्रावण मास में हर मंगलवार को किया जाने वाला मंगला गौरी व्रत न केवल गृहस्त महिलाओं, बल्कि अविवाहित कन्याओं के लिए भी लाभप्रद माना गया है । इस व्रत से मंगल दोष भी दूर होता है श्रावण मास आरंभ होने के साथ ही पूजा-पाठ का दौर शुरू हो जाता है । सोमवार को भगवान शिव को जल अर्पित करने के अगले दिन मंगलवार को महिलाओं का मंगलागौर व्रत आता है । इस व्रत से महिलाएं देवी गौरी से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति, इच्छित…
Read Moreसुख-समृद्धि और संतान नाग पंचमी का वरदान
नाग पंचमी सावन में शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है । इस दिन नाग की पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि आती है, अकारण होने वाले भय से मुक्ति मिलती है और संतान दीर्घायु होती है । नाग पंचमी पर नागों या सर्पो को पूजने का महत्व यही है कि हम उनके कोप से बचे रहे । हमारा परिवार उनका शिकार न बने । हमारी संतान दीर्घायु हो । यो तो प्रत्येक महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी नाग पंचमी कहलाती है, मगर…
Read Moreदेव शयनी एकादशी, श्रीहरि के शयन की एकादशी
देव शयनी एकादशी स्वयं भगवान विष्णु को भी प्रिय है । जो प्राणी इस दिन भगवान् विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना करके उन्हें शयन करवातें हैं, उन्हें शिवलोक और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी देव शयनी एकादशी, पद्मा तथा पद्मनाभा एकादशी के नाम से जानी जाती है । इस सम्बन्ध में पुराणों में वर्णित है कि भगवान श्रीकृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर के प्रश्न करने पर कहतें हे, ‘ हे, धर्मराज, यह एकादशी समस्त एकादशियों में सर्व श्रेष्ठ, उत्तम, पावन तथा श्रीहरि को सर्वप्रिय हैं । यह एकादशी…
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